सफलता की कहानी

बेंगलुरु स्थित प्राकृतिक इतिहास मंच ने अपनी वार्षिक फोटोग्राफी प्रतियोगिता में नई श्रेणी की शुरुआत की

नई दिल्ली: प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए एक अच्छी खबर आई है। बेंगलुरु में आधारित प्राकृतिक इतिहास मंच, ‘नेचर इन फोकस’ ने अपनी वार्षिक फोटोग्राफी प्रतियोगिता में नई श्रेणी ‘हिमालय ऑन द एज’ को शामिल किया है। यह नई श्रेणी विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती गंदगी और उसका वहां की वन्यजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

‘नेचर इन फोकस’ जो प्राकृतिक जीवन पर आधारित उत्कृष्ट फोटोग्राफी को प्रोत्साहित करता है, इस बार हिमालय क्षेत्र की वातावरणीय चुनौतियों को उजागर करने के लिए यह कदम उठा रहा है। हिमालयी क्षेत्र अपनी जैव विविधता और परिपाटी के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन अनियंत्रित कूड़ा-करकट से यह क्षेत्र गंभीर खतरे में है। नई श्रेणी के तहत फोटोग्राफर हिमालयी वन्यजीवन और पर्यावरण पर गंदगी के प्रभाव को अपने कैमरे के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय कई विशेषज्ञों और संस्थाओं ने इस पहल का स्वागत किया है। वे मानते हैं कि इस तरह की प्रतियोगिताएं न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता बढ़ाती हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ती हैं। इसमें फोटोग्राफरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जो प्रकृति के सौंदर्य और उसकी मौजूदा समस्याओं को दर्शाकर आम जनता को सशक्त संदेश देते हैं।

नेचर इन फोकस के संस्थापक ने कहा, “हिमालय हमारे देश की आत्मा है। वहां की हिमनद, जंगल और जीव-जंतु हमारे पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब हम वहां के प्रदूषण और गंदगी को कैमरे की नजर से दिखाएंगे, तब हमें उम्मीद है कि समाज में जागरूकता और संरक्षण के लिए दबाव बढ़ेगा।”

इस श्रेणी में दाखिला लेने वाले फोटोग्राफरों को प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और फोटोग्राफी कौशल दोनों आवश्यक होंगे। प्रतियोगिता में चयनित तस्वीरों को विभिन्न प्रदर्शनों और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा ताकि वे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

साथ ही, विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में सफाई और संरक्षण को लेकर स्थानीय समुदायों का सक्रिय सहयोग भी जरूरी है। प्रतियोगिता की मदद से ये मुद्दे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद का विषय बनेंगे।

अंत में, यह पहल हिमालयी क्षेत्र की भव्यता की रक्षा और उसकी स्थिरता बनाए रखने के लिए एक सकारात्मक कदम है। साथ ही यह सभी नागरिकों को प्रकृति की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने और योगदान देने की सीख भी देती है। ‘हिमालय ऑन द एज’ श्रेणी निश्चित रूप से प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक नई उम्मीद लेकर आई है।

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