ज़ुबिन गर्ग मौत मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने सात आरोपियों पर आरोप तय किए

गुवाहाटी, 27 अप्रैल: असम के मशहूर गायक और संगीतकार जुबिन गर्ग की मौत को लेकर नई जांच में गुरुवार को फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। यह मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा तैयार चार्जशीट के आधार पर हुई है। जुबिन गर्ग का निधन सिंगापुर में 2025 में तैराकी के दौरान हुआ था, लेकिन इस मामले में अलग-अलग आरोप और विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आई हैं।
विशेष जांच दल ने चार प्रमुख आरोपी निर्धारित किए हैं, जिन पर जुबिन गर्ग की हत्या का आरोप है। इसके साथ ही कोर्ट ने सात अन्य आरोपितों के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में केस रजिस्टर किया है। सिंगापुर की कोरoner की रिपोर्ट में मौत को ‘हादसात्मक डूबने’ का मामला बताया गया था, लेकिन असम के मुख्यमंत्री ने इसे हत्या और साजिश करार दिया है। मुख्यमंत्री का दावा है कि जुबिन गर्ग की हत्या किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी, जिसे अब कोर्ट में साबित करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमने इस मामले में संपूर्ण जांच कराई है और स्पष्ट रूप से पता चला है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। जुबिन गर्ग के साथ बड़े पैमाने पर षडयंत्र रचा गया था।” इस बीच, पुलिस और SIT ने कई गवाहों से पूछताछ की है और अलिबाइ की जांच के दौरान महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
वहीं, सिंगापुर की आधिकारिक रिपोर्ट और असम सरकार की जांच में आयीं रेपोर्ट्स में भारी मतभेद देखने को मिले हैं। सिंगापुर के कोरoner ने शुरुआती रिपोर्ट में इसे एक दुखद दुर्घटना बताया था, लेकिन आरोपियों की भूमिका पर संदेह जताते हुए SIT ने इससे अलग निष्कर्ष निकाला है। जांच के दौरान, असम पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों का भी पता लगाया है जो हत्या के पीछे की गुत्थी खोल सकते हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम मामले के हर पहलू को जांचने के बाद चार्जशीट दाखिल कर रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत हैं जो अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे। यह प्रकरण जल्द ही निपटाया जाएगा ताकि न्याय मिल सके।”
जुबिन गर्ग के प्रशंसक और असम के नागरिक इस मामले में न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। जुबिन गर्ग की मौत के बाद से ही उनके चाहने वाले और कई समाजसेवी न्याय की मांग कर रहे हैं कि सच सामने आना चाहिए। अब कोर्ट प्रक्रिया के शुरू होने से उम्मीद जताई जा रही है कि यह काला सच जल्द ही सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट की इस कार्यवाही को स्थानीय मीडिया और विशेषज्ञ भी महत्वपूर्ण बता रहे हैं, क्योंकि इससे जुड़े सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा और प्रतिक्रिया जारी है। जुबिन गर्ग के निधन से असम की सांस्कृतिक दुनिया में एक बड़ा शोक हुआ था, और अब उनके नाम पर यह न्यायिक लड़ाई भी चल रही है।