डर्मेटोलॉजिस्ट्स का चेतावनी: सैलून बोटॉक्स, फिलर्स, लेज़र्स और IV ड्रिप्स से सावधान रहें

नई दिल्ली: हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने स्पष्ट किया है कि इंजेक्टेबल उत्पादों को कॉस्मेटिक्स में शामिल नहीं किया जाएगा। यह बयान उन बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जो त्वचाविज्ञानी अब सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर रहे हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट्स का कहना है कि सैलून, वेलनेस क्लीनिक और यहां तक कि घरों में हो रहे अनियंत्रित बोटॉक्स, फिलर्स, लेज़र्स और IV ड्रिप्स जैसी सौंदर्य प्रक्रियाएं गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं। त्वचा की जलन, गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं, खराब लगे हुए फिलर्स और यहां तक कि HIV संक्रमण जैसी बीमारियां सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोटॉक्स और फिलर्स जैसे इंजेक्टेबल उपचार केवल योग्य और प्रशिक्षित चिकित्सकों के अधीन ही किए जाने चाहिए। नियमों की कमी और गैर-प्रमाणित उत्पादों के इस्तेमाल से मरीजों को अनचाहे खतरे का सामना करना पड़ता है। इन प्रक्रियाओं में सैनेटरी कंडीशंस का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है, जो अक्सर इन अनधिकृत स्थानों पर ध्यान में नहीं रखा जाता।
डर्मेटोलॉजिस्ट्स का यह भी कहना है कि लेज़र ट्रीटमेंट्स में भी विशेषज्ञता और सही उपकरणों का होना आवश्यक है। गलत तरीके से की गई लेज़र थेरेपी त्वचा को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं, IV ड्रिप्स का गलत इस्तेमाल शरीर में गंभीर दुष्प्रभाव कर सकता है।
CDSCO के स्पष्टिकरण का मकसद है कि इंजेक्टेबल उत्पादों को कॉस्मेटिक्स की श्रेणी में न लेकर इन्हें दवाओं की तरह ही कड़े नियमों के तहत रखा जाए ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। विशेषज्ञ इस कदम को सराहनीय बता रहे हैं परंतु इसके प्रभावी कार्यान्वयन की भी आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।
सैलून और वेलनेस क्लीनिकों में अनधिकृत रूप से सौंदर्य उपचार कराना अब एक बड़ी समस्या बन चुका है। त्वचा विशेषज्ञ इन स्थानों पर इलाज कराने से बचने की सलाह देते हैं और त्वरित किसी भी असामान्य लक्षण के मामले में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की भी सिफारिश करते हैं।
समाज में जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित सौंदर्य उपचार की प्रथा को स्थापित करने के लिए सरकार और चिकित्सा निकायों को मिलकर काम करना होगा। तभी ही ये जोखिम कम किए जा सकेंगे और आम जनता को सही दिशा मिल सकेगी।