ओवैसी ने मतदान सूची से वंचित लोगों को कल्याण लाभ न दिए जाने की निंदा की

हैदराबाद: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में सरकार की ओर से उन लोगों को मिलने वाले कल्याणकारी लाभों से वंचित किए जाने की कड़ी निंदा की है जो मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार की कल्याण योजनाएं केवल मतदाता सूची में नाम दर्ज लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि उन सभी पात्र नागरिकों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।
ओवैसी ने संवाददाताओं से बातचीत में स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाएं सरकार की आम जनता के लिए हैं और इनमें पात्रता का आधार मतदाता सूची होना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “वक़्त और परिस्थिति चाहे जो हो, सरकार की जिम्मेदारी है कि वे सभी योग्य नागरिकों तक अपनी कल्याण योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। मतदाता सूची से नाम कटने या शामिल न होने की वजह से किसी को भी लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोर दिया कि मतदान सूची में नाम न होने के कारण लोगों को सरकार की सामाजिक और आर्थिक योजनाओं से बाहर रखना एक चिंता का विषय है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा कि ऐसे कदम से आम जनता में असंतोष बढ़ सकता है और लोगों के बीच सामाजिक दूरी भी बनाई जा सकती है।
देश भर में अनेक सरकारी योजनाएं हैं जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जन धन योजना आदि, जिनका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक सहायता पहुंचाना है। लेकिन यदि इन योजनाओं में लाभार्थियों का चयन केवल मतदाता सूची से जुड़ेगा, तो कई योग्य और जरूरतमंद लोग इनसे वंचित रह जाएंगे।
ओवैसी ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह अपने हितग्राहियों की सूची तय करते समय सामाजिक न्याय, समानता और निष्पक्षता को प्रमुखता दे। उन्होंने कहा, “जब तक कोई नागरिक देश का स्थायी नागरिक है और योजना के लिए पात्र है, तब तक उसे लाभ देना चाहिए, न कि केवल मतदाता सूची में होने के आधार पर।”
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ओवैसी की ये टिप्पणियां उन नागरिकों की आवाज़ बनकर उभरी हैं जिन्हें सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित किया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक समावेशी तथा पारदर्शी नीति अपनानी चाहिए ताकि देश के हर हिस्से के लोग इनसे लाभान्वित हो सकें।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देगी, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी के बयान ने इस विषय को सार्वजनिक चर्चा में लाने का काम किया है। आगामी समय में नीति निर्माताओं को इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि सबसे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को कैसे उचित कल्याण लाभ मिल सके, जिससे वे समाज के मुख्य धारा में शामिल हो सकें।