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पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का सार्वजनिक पद पर कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो सकता है

देश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रह चुके पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का वर्तमान राजसभा का कार्यकाल 25 जून को समाप्त हो रहा है। जनतादल (सेक्यूलर) यानी जेडी(एस) के पास इस बार उनके पुनर्निर्वाचन के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इससे उनके सार्वजनिक कार्यालय में सक्रिय भूमिका पर असर पड़ सकता है।

एच.डी. देवगौड़ा ने लंबे समय तक भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने 1996 से 1997 तक भारत के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दी। इसके बाद वे कर्नाटक की राजनीति में भी सक्रिय रहे। विधानसभा और संसद दोनों में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने जनता के लिए काम किया है।

हालांकि, इस बार उनकी पार्टी जेडी(एस) के पास राजसभा में उतना बल नहीं है कि वे देवगौड़ा जी को दोबारा निर्वाचित करा सकें। इसके पीछे जेडी(एस) की हालिया कमजोर होती स्थिति और गठबंधन के बदलते समीकरण आते हैं। राजनीतिक दलों के बीच समीकरण और सीटों का बंटवारा इस मायने में बेहद महत्वपूर्ण होता है।

जानकार बताते हैं कि राजसभा की सीटों पर चुनाव मापदंडों के आधार पर होता है, जिसमें राज्य विधानसभाएं जरूरी भूमिका निभाती हैं। जेडी(एस) की राज्य विधानसभा में संख्या कम होने के कारण वे अपने वरिष्ठ नेता को पुनर्णिर्वाचित कराने में असमर्थ हो सकते हैं। इससे देवगौड़ा जी के राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।

इस बारे में जेडी(एस) के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी उनकी स्थिति को समझती है और किसी भी स्थिति से पार पाने के लिए रणनीति बना रही है। हालांकि, अभी तक कोई फाइनल निर्णय सामने नहीं आया है। राजकीय और राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि देवगौड़ा जी के जाने के बाद जेडी(एस) की रणनीति क्या रहेगी और नया नेतृत्व कौन होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय में, देवगौड़ा जी की राजनीति में लंबे समय तक सेवा के कारण उनके अनुभव से पार्टी को भविष्य में भी लाभ मिलेगा। लेकिन चुनाव परिणाम और गठबंधन की मजबूती के आधार पर ही उनकी अगली राजनीतिक भूमिका तय होगी। कर्नाटक और केंद्र की राजनीति में इस बदलाव का महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है।

इस बीच जनता और पार्टी कार्यकर्ता देवगौड़ा जी के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं और उनके राजनीतिक भविष्य पर नजर बनाए हुए हैं। आगामी दिनों में राजनीतिक परिदृश्य में होने वाले इन बदलावों को ध्यान से देखना होगा।

इस प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का 25 जून को खत्म हो रहा कार्यकाल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जो न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा बल्कि जेडी(एस) की ताकत और केंद्र की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित करेगा।

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