104 वर्ष की उम्र में चेन्नई की रत्नि बाई चोरडिया 149 सदस्यों वाले परिवार की केंद्र बनी हुई हैं

चेन्नई। माइलापुर की 104 वर्षीय रत्नि बाई चोरडिया आज भी अपने 149 सदस्यों वाले विस्तारित परिवार की धुरी बनी हुई हैं। युवावस्था में उन्होंने कांग्रेस नेताओं का अपने घर आतिथ्य किया था और अब वह पल्लंकुज़्ही खेलती हैं, जो उनकी जीवंतता और अनुशासन को दर्शाता है।
रत्नि बाई का जीवन कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने न केवल परिवार का मार्गदर्शन किया बल्कि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनके संस्मरणों में वे कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं से मिलने और उनके साथ बातचीत करने की कहानियां साझा करती हैं।
अपने वर्तमान जीवन में भी, वह दैनिक नियमों का पालन करती हैं और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखती हैं। उनका पसंदीदा खेल पल्लंकुज़्ही है, जो वे कई घंटों तक खेलती रहती हैं। यह खेल न केवल उनके मनोरंजन का जरिया है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी बनाए रखने में सहायक है।
परिवार के सदस्य बताते हैं कि रत्नि बाई ने कठिनाइयों का सामना धैर्य और साहस के साथ किया है। उन्होंने अपने जीवन में परिवार के कल्याण के लिए कई त्याग किए हैं। आज भी परिवार के युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं।
रत्नि बाई की कहानी इस बात का प्रमाण है कि उम्र केवल एक संख्या है, जब आपके पास अनुशासन, प्रेम और सामाजिक जुड़ाव हो। चेन्नई की इस बुजुर्ग महिला ने अपनी कहानी से यह संदेश दिया है कि परिवार और समाज में सम्मान पाने के लिए कर्मठता और सादगी आवश्यक है।
माइलापुर की यह बुजुर्ग महिला स्थानीय समुदाय में एक वरदान के समान हैं। उनके अनुभव और जीवनशैली ने कई लोगों को प्रभावित किया है जो उन्हें एक आदर्श स्वरूप मानते हैं। उनके बेटे-बेटियां, पोते-पोती उन्हें सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं।
चौरी द्वार पर बसे इस परिवार की गिनती चेन्नई के सबसे बड़े परिवारों में होती है, जहां रत्नि बाई चोरडिया की जीवनशैली और अनुशासन ने परिवार को सदैव एकसाथ बनाए रखा है। उनके जीवन के ये पहलू न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
चाहे राजनीतिक दशकों हों या पारिवारिक आयोजन, रत्नि बाई की उपस्थिति हमेशा एक सशक्त और शांति देने वाली होती है। आज भी जब वे अपने सदस्यों के बीच होती हैं, तो संवाद से लेकर खेलों तक उनका योगदान अमूल्य माना जाता है।
इस प्रकार, रत्नि बाई चोरडिया का 104 वर्षों का जीवन अनुभव और परिवार के लिए समर्पण उन्हें चेन्नई के इतिहास में एक सम्मानजनक स्थान देता है।