हिमाचल चाहता है वित्तीय प्रभाव का आकलन करने के लिए उच्च स्तरीय समिति; पंजाब चाहता है विशेष श्रेणी की स्थिति

नई दिल्ली: 11वीं निति आयोग की संचालन परिषद की बैठक में ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में की। बैठक का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की विकास नीतियों और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार-विमर्श करना था।
बैठक में हिमाचल प्रदेश ने वित्तीय प्रभाव का जायजा लेने हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया। राज्य सरकार ने अपने विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता तथा उनके प्रभाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही पंजाब राज्य ने विशेष श्रेणी की स्थिति की मांग फिर से उठाई, जिसके तहत उन्हें अधिक आर्थिक सहायता और विकास परियोजनाओं में प्राथमिकता मिल सके। यह दोनों मुद्दे राज्यों के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने समावेशी विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश के सभी राज्य और क्षेत्र समान अवसर पायें, तभी ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि निति आयोग सभी सुझावों का गंभीरता से मूल्यांकन करेगा और राज्यों की समस्याओं का समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।
इस बैठक में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जल संरक्षण और आर्थिक विकास जैसे विषयों पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समावेशी मानव विकास केवल आर्थिक वृद्धि से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार से जुड़ा है।
विशेष रूप से, हिमाचल प्रदेश की उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग से यह उम्मीद जताई जा रही है कि वित्तीय प्रबंधन और विकास परियोजनाओं का बेहतर आकलन होगा, जिससे उसे अधिक प्रभावी निर्माण किया जा सकेगा। वहीं पंजाब की विशेष श्रेणी की स्थिति की मांग से राज्य की विकास दर को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी।
निति आयोग की यह बैठक देश की समग्र प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो राज्यों की आवश्यकताओं और केंद्र सरकार की सहयोगात्मक रणनीतियों को सशक्त बनाएगी। आने वाले समय में इनके परिणाम से भारत में व्यापक और समावेशी विकास की राह आगे बढ़ेगी।