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बैंक ऑफ़ बरौदा के ‘लोन घोटाले’ में सोना लौटाने की मांग पर प्रदर्शनकारी

एलूरु: “हमारा सोना लौटाओ” के नारों के साथ प्रभावित किसान, छोटे व्यापारी, कारीगर और अन्य खाता धारक बैंक ऑफ़ बरौदा के खिलाफ कांस्ट्रेलेंट केंद्र पर प्रदर्शन करते हुए बैंक कर्मचारियों पर उनके जमानत के पीछे रखा गया सोना गबन करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन करने वाले व्यक्तियों का कहना है कि उन्होंने अपने कर्ज के बदले में बैंक को अपना कीमती सोना जमानत के रूप में दिया था, लेकिन अब वह सोना बैंक के अधिकारियों द्वारा झूठे और भ्रष्ट तरीकों से गुम हो गया है। इस गलती के कारण उन्हें न केवल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा भी खतरे में पड़ गई है।

प्रदर्शन में शामिल एक किसान ने बताया, “हमने अपनी ज़मीन गिरवी रखकर बैंक से ऋण लिया था। लेकिन अब बैंक अधिकारी हमारे जमानत के सोने की ग़ैरकानूनी ढंग से हेरफेर कर रहे हैं, जिससे हमारा पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।”

छोटे व्यापारी और कारीगर भी इस घोटाले से विशिष्ट रूप से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवहार से उनकी व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं। वे न्यायिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी जमा पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

बैंक ऑफ़ बरौदा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच नेशनल एवजेंन्सी या बैंकिंग रेगुलेटर की देखरेख में की जाएगी।

प्रदर्शनकारी यह भी मांग कर रहे हैं कि बैंक प्रबंधन तुरंत इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले और प्रभावितों के जमानती सोने को वापस किया जाए, अन्यथा वे संघर्ष को और तेज करेंगे। इस घटना ने स्थानीय जनता में बैंकिंग संस्थानों पर विश्वास को भी तनावग्रस्त कर दिया है और विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना आवश्यक हो गया है।

यह मामला एक सतर्क संदेश देता है कि बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा और जवाबदेही कितनी अहम है, खासकर उन लोगों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर और बैंकिंग प्रणाली पर निर्भर हैं। इस घोटाले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि दोषी कौन हैं और किस प्रकार की सजा होनी चाहिए।

फिलहाल, affected account holders और बैंक के बीच की कड़वाहट बढ़ती जा रही है, और इस मामले में नागरिक, विधि विशेषज्ञ और बैंकिंग अधिकारी भी गहन नजर रखे हुए हैं।

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