प्रियांक खरगे ने कहा, कर्नाटक सरकार की ओर से लिखे पत्र का आरएसएस जवाब देने से नहीं मना कर सकता

कर्नाटक, 27 अप्रैल: कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तंज कसते हुए कहा है कि जब आरएसएस अपनी सूचना और रिकॉर्ड का अनुरोध करता है, तो वह सवाल करता है कि दस्तावेज़ मांगने में क्या गलत है। लेकिन जब कर्नाटक सरकार आरएसएस से दस्तावेज मांगती है, तब आरएसएस घबराया हुआ नजर आता है।
प्रियांक खरगे ने बयान जारी करते हुए कहा कि आरएसएस को यह स्वीकार करना चाहिए कि सरकार की तरफ से जारी किए गए पत्रों का जवाब देना उनका कर्तव्य है, खासकर जब वह कर्नाटक सरकार की ओर से लिखा गया हो। उन्होंने कहा, “आरएसएस यह दावा नहीं कर सकता कि वह कर्नाटक सरकार की ओर से भेजे गए पत्रों का जवाब नहीं देगा। यह जवाबदेही की बात है।”
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस को अपनी पारदर्शिता पर सवाल उठाने वालों के सामने खड़ा होना चाहिए। सरकार ने सिर्फ अपना काम किया है और संवैधानिक जिम्मेदारी निभाई है। दस्तावेजों की मांग कोई नई बात नहीं है और यह स्वाभाविक भी है कि सरकार को इस तरह की जानकारी लेना जरूरी हो सकती है।
कर्नाटक में चल रही जांच और आरएसएस के रवैये को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार का पक्ष मजबूत है और वह सभी आवश्यक कार्रवाई कर रही है ताकि तथ्य सामने आ सकें। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से मामले की गहराई को समझें और अफवाहों से दूर रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक सरकार की इस कदम का मकसद केवल जांच प्रक्रिया को सही दिशा देना है, न कि किसी संगठन के खिलाफ लड़ाई शुरू करना। उन्होंने कहा कि जवाब देना और दस्तावेज उपलब्ध कराना लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
इस पूरे मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी आ रही है, जिसमें कुछ ने सरकार का समर्थन किया है तो कुछ ने सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि अगली कार्रवाई क्या होगी और आरएसएस किन सीमा तक अपनी भूमिका स्पष्ट करता है।