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सचीवालय में आगंतुकों पर प्रतिबंध हटाए: सीपीआई(एम)

सचीवालय में आगंतुकों पर नये प्रतिबंधों पर सीपीआई(एम) का विरोध

नई दिल्ली। हाल ही में सचीवालय में लागू किए गए नए प्रतिबंधों को लेकर विपक्षी दलों में असंतोष व्याप्त है। राज्य सचिव पी. शनमुगम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि पहले से ही बहुत सारे प्रतिबंध मौजूद हैं और इन नये नियमों के कारण जनता सरकार की मशीनरी के करीब नहीं जा पाएगी।

पी. शनमुगम ने कहा, “सरकार ने जो नये उपाय अपनाए हैं, वे आम लोगों के लिए सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों तक पहुंचना और भी मुश्किल बना देंगे। इससे सरकार और जनता के बीच की दूरी बढ़ेगी, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है।”

उन्होंने बताया कि पहले से ही कई सुरक्षा और प्रशासनिक नियम लागू थे, जिनमें आगंतुकों की जांच से लेकर प्रवेश पर कई स्तर की अनुमति शामिल थीं। नए प्रतिबंधों के तहत आगंतुकों को ऑनलाइन पंजीकरण करवाना होगा और उनकी पहचान संबंधी कड़े योग्यता नियम भी लागू किए गए हैं। इससे खास तौर पर निर्धन तथा प्रवासी वर्ग के लिए सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना जटिल हो जाएगा।

सीपीआई(एम) के इस दावे के समर्थन में कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी सामने आए हैं, जिनका कहना है कि सरकार को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी कार्यालयों में आने-जाने के लिए प्रतिबंधों को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि नागरिक बिना किसी बाधा के अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

सरकार के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये कदम सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक सुव्यवस्था को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी भी नागरिक को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा और आवश्यक सेवाएं हमेशा उपलब्ध रहेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल जरूरी हैं, लेकिन उन्हें जनता की सुविधा को दर्शाने के साथ संतुलित करना चाहिए। किसी भी तरह के अनावश्यक प्रतिबंध लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को कमजोर कर सकते हैं।

इस विवाद के बीच, राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज होती जा रही है कि सरकार को जनता के साथ संवाद बढ़ाने और उनकी परेशानियों को सुनने के लिए कदम उठाने चाहिए, न कि उनके संपर्क को सीमित करने वाले उपाय अपनाने चाहिए।

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