कैसे आरोही ने युवा हिन्दुस्तानी कलाकारों के लिए एक मंच बनाया

शास्त्रीय संगीत का समर्पित उत्सवः पंचम निषाद महोत्सव 20 वर्षों से प्रतिभाओं को मंच दे रहा है
देश के शास्त्रीय कला प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर साबित हुआ पंचम निषाद महोत्सव अब अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस महोत्सव की शुरुआत शशी व्यास द्वारा की गई थी, जिन्होंने इसे एक ऐसा मंच बनाया जहां युवा और उभरते हुये कलाकार अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपराओं को सहेजना और उन्हें नयी पीढ़ी तक पहुंचाना है।
पंचम निषाद महोत्सव की शुरुआत 2004 में हुई थी और तब से लेकर आज तक यह कला जगत में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। शशी व्यास ने इस महोत्सव के माध्यम से न केवल कलाकारों को प्रदर्शन का अवसर दिया बल्कि उन्हें कड़े प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से भी जोड़ा। इसके असर आज स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं जहां कई कलाकार, जो यहाँ मंच पर खड़े हुए, अब देश-विदेश में शास्त्रीय संगीत के दिग्गज बन चुके हैं।
महोत्सव की संरचना में राग-रागिनियों की प्रस्तुति, कथक और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्यों के प्रदर्शन तथा संगीत वाद्य यंत्रों के संगम को समाहित किया गया है। इसकी खासियत यह भी है कि यहाँ केवल प्रदर्शनों तक सीमित न रहकर प्रतिभाओं को प्रशिक्षित भी किया जाता है। वस्तुतः यह आयोजन एक शिक्षा केंद्र के रूप में भी कार्य करता है।
पिछले दो दशकों में पंचम निषाद महोत्सव ने नए कलाकारों की तलाश में कई शहरों का दौरा किया और हजारों संगीतार्तियों को अपनी कला दिखाने का अवसर प्रदान किया। इसका परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत युवाओं में भी स्वस्थ रूप से जारी है।
शाशी व्यास ने हाल ही में कहा कि “हमारा लक्ष्य केवल मनोरंजन करना नहीं बल्कि ज्ञान और कला को संरक्षित करना है। इस महोत्सव के जरिये हम चाहते हैं कि हर युवा कलाकार को नयी उड़ान मिले।” इस उत्सव ने संगीत प्रेमियों और कलाकारों दोनों के बीच एक महत्वपूर्ण पुल का कार्य किया है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि पंचम निषाद महोत्सव न केवल शास्त्रीय संगीत का आयोजन है बल्कि यह एक ऐसी परंपरा है जिसने पिछले 20 वर्षों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मजबूती से आगे बढ़ाया है। इसके द्वारा दी गई प्रेरणा अगली पीढ़ी के कलाकारों को नई दिशाएं दे रही है, जिसके कारण भारत का शास्त्रीय संगीत विश्व मंचों पर और अधिक चमकदार बनता जा रहा है।