देश से 31 मार्च की समयसीमा से पहले माओवादी उन्मूलन, सुरक्षा बलों की बहादुरी की बदौलत: अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा है कि देश से माओवादी समस्या को 31 मार्च की निर्धारित समयसीमा से पहले ही खत्म कर दिया गया है, और यह उपलब्धि मुख्य रूप से देश की सुरक्षा बलों की बहादुरी और संघर्ष के कारण संभव हुई है। शाह ने यह बात स्पष्ट रूप से कही कि यह सफलता केवल भाजपा शासित राज्यों में नहीं बल्कि उन राज्यों में भी संभव हुई जहाँ गैर-भाजपा सरकारें भी केंद्र सरकार की माओवादी उन्मूलन योजना में सहयोगी रही हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “मैं किसी संकोच के बिना यह कह सकता हूं कि कई गैर-भाजपा राज्यों ने केंद्र सरकार के माओवादी उन्मूलन के प्रयासों में मदद की, लेकिन छत्तीसगढ़ में पूर्व कांग्रेस सरकार ने कोई सहयोग नहीं दिया।” अमित शाह का यह बयान माओवादी उग्रवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के महात्वपूर्ण प्रयासों को रेखांकित करता है, साथ ही राज्यों की भूमिका की भी पड़ताल करता है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने माओवादी प्रभावित इलाकों में व्यापक रणनीतियों को लागू करते हुए सुरक्षा संचालन को तेज किया है, साथ ही स्थानीय विकास और जनकल्याण योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। इस कदम से न केवल माओवादी तत्वों की शक्ति कम हुई है, बल्कि उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में विकास के नए सिरे से अवसर भी उत्पन्न हुए हैं।
अमित शाह ने कहा कि माओवादी उन्मूलन के लिए केंद्र और विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी दिनों में सभी राज्य सरकारें मिलकर नक्सलवादी समस्या को पूरी तरह समाप्त करने में योगदान देंगी। उन्होंने माओवादी गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की साहसिक कार्रवाई की भी प्रशंसा की।
विशेषज्ञों के अनुसार, माओवादी उन्मूलन की यह उपलब्धि सुरक्षा बलों की अनेक सफल अभियानों, तकनीकी सहायता में वृद्धि, और पैठ कमजोर करने हेतु सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के कारण संभव हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि 2014 के बाद से माओवादी हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है, जो केंद्रीय नीति और स्थानीय प्रशासन की एकजुट कार्रवाई का प्रतिफल है।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग, वैकल्पिक रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, तथा कानून-व्यवस्था के कड़े कदमों ने माओवादी सीमाओं को घटाने में अहम भूमिका निभाई है। गृह मंत्री अमित शाह ने यह सुनिश्चित किया कि सरकार निरंतर सतर्क रहेगी और देश को माओवादी उन्मूलन के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
इस बीच, विपक्षी दलों से भी अपेक्षा की गई है कि वे इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास की दिशा में सकारात्मक सहयोग करें। समग्र रूप से, माओवादी उन्मूलन अभियान की सफलता भारत की आंतरिक सुरक्षा और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।