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कमजोर वैश्विक सहभागियों और बढ़ते तेल भावों के बीच स्टॉक मार्केट में तेजी शुरूआती कारोबार में गिरावट

नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख संकेतक आज शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की। बीएसई सेंसेक्स 517.11 अंकों की गिरावट के साथ 74,667.51 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 152.45 अंक टूटकर 23,475.80 पर आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक बाजारों पर कमजोर वैश्विक आर्थिक संकेतों और बढ़ते ऊर्जा शुल्क का दबाव महसूस किया जा रहा है, जिससे स्थानीय निवेशकों में बेचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। अमेरिका और यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी गिरावट देखी गई है, जिसके प्रभाव से भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के साथ ही ऊर्जा कंपनियों और अन्य क्षेत्रीय शेयरों में दबाव बढ़ा है। बढ़ती तेल कीमतें उत्पादन लागत बढ़ाने के साथ ही मुद्रास्फीति को भी बढ़ावा देती हैं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ जाती है। देश के प्रमुख तेल उत्पादन और उपभोक्ता क्षेत्र की कंपनियों के शेयर जारी मंदी की वजह से भारी बिकवाली में रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार की अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। आगामी दिनों में अमेरिका में मुद्रास्फीति से जुड़ी रिपोर्टें और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत घोषणाएं बाजार की दिशा निर्धारित करेंगी।

वहीं, बैंकिंग और आईटी सेक्टर ने कुछ हद तक स्थिति संभाली, लेकिन व्यापक बाजार पर इसका कोई खास सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। वस्तुतः, बाजार में बिकवाली का दबाव बनी रहा और निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया।

विश्लेषण के अनुसार, यदि वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता आती है और आर्थिक संकेतक सुधरते हैं, तो बाजार में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोची-समझी निवेश रणनीति अपनाने का है।

कुल मिलाकर शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में गिरावट के पीछे वैश्विक अनिश्चितताएं, बढ़ते तेल मूल्य और स्थानीय निवेशकों की बेचने की प्रवृत्ति मुख्य कारण रहे। बाजार विशेषज्ञ निरंतर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और आने वाले समय में बेहतर संकेत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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