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चित्रा लक्षुमनन ने भरतनाट्यम के विविध रंगों की खोज की

युवती नृत्यांगना ने भरतनाट्यम के मार्गम के विविध पहलुओं से मंत्रमुग्ध किया दर्शक

चेन्नई में हाल ही में आयोजित एचसीएल कॉन्सर्ट सीरीज में सुश्रृख्षित भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत करते हुए, स्रेकला भरत की शिष्या इस युवा कलाकार ने मार्गम की कई रोचक और मनमोहक परतों को दर्शाया। यह प्रदर्शन कला प्रेमियों के लिए एक यादगार शाम साबित हुई।

भरतनाट्यम, जो दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य की एक प्रमुख शैली है, अपने कठोर संरचना और भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए पहचाना जाता है। इस युवा नृत्यांगना ने पारंपरिक मार्गम में संगीत के अनुरूप नृत्य अंगों का संयोजन कर एक समृद्ध अनुभव प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत अलारिप्पु से हुई, जो नृत्य की एक प्राचीन और अनिवार्य धनात्मक प्रस्तुति है। इसके बाद अजारिप्पु, जिसे माध्यमिक विषय के रूप में देखा जाता है, के माध्यम से नृत्यांगना ने अपनी तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।

विशेष रूप से, कलाकार ने निर्वाचित पदों में भाव-भंगिमाओं के माध्यम से कथात्मक नाट्य के तत्वों को जीवंत किया। दर्शक इस भावपूर्ण प्रस्तुति से गहराई से जुड़े नजर आए।

स्मरणीय है कि स्रेकला भरत के दूरदर्शी निर्देशन में प्रशिक्षित इस छात्रा ने नृत्य के मार्मिक, शाब्दिक और सांकेतिक स्तरों को समझते हुए इसे मंच पर उतारा। उनकी प्रस्तुति ने मार्गम की जटिलताओं को सहजता से प्रस्तुत कर युवा और वरिष्ठ दर्शकों दोनों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम को उपस्थित कला विशेषज्ञों और प्रेमियों ने अत्यधिक सराहा। यह प्रदर्शन नृत्य की परंपरा को आधुनिक संदर्भ में जीवित रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

इस युवा कलाकार की यह प्रस्तुति न केवल भरतनाट्यम की कला को सम्मानित करती है, बल्कि इसके विविध रंगों को भी उजागर करती है, जो इसे प्रशंसकों और आगामी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनाती है।

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