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सरकार ने 30 अक्टूबर तक कपास पर आयात शुल्क में छूट दी

नई दिल्ली, 27 अप्रैल: भारतीय कपड़ा क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर लगने वाले आयात शुल्क को 30 अक्टूबर तक लंबित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय का मकसद देश के कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना और उत्पादन लागत को कम करना है।

सरकार के इस कदम से घरेलू कपास की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे कपड़ा निर्माता अनवरत कार्य कर सकेंगे और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी खुलेगे।

पिछले कुछ वर्षों में घरेलू कपास उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसके कारण कई बार कपास की किल्लत होने लगी थी। इस संदर्भ में यह आयात शुल्क में छूट उद्योग के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आई है। उधर, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस निर्णय से कपास की सही मात्रा और गुणवत्ता उपलब्ध होने से उत्पादकता में वृद्धि होगी और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि आयात शुल्क में अवधी सीमित है और सरकार इसके प्रभाव का निरंतर मूल्यांकन करती रहेगी। देश के कपड़ा क्षेत्र को यह भी उम्मीद है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और उपभोक्ताओं को सस्ती कीमत पर वस्त्र उपलब्ध होंगे।

इस निर्णय को उद्योग विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम बताया है जो कि कोविड महामारी के बाद आर्थिक सुधार की गति को बढ़ावा देने के लिए जरूरी था। कपड़ा क्षेत्र में अनुमान है कि इस दौरान नई तकनीकों में निवेश भी बढ़ेगा और निर्यात पर आने वाली बाधाओं में कमी आएगी।

सरकार का यह प्रोत्साहन भारतीय उद्योग को वैश्विक बाजार में मजबूती से खड़ा करने की दिशा में एक प्रभावी रणनीति है। आगामी महीनों में कपास की उपलब्धता बढ़ने से भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की संभावनाएं अधिक प्रबल होंगी।

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