नया केरल कैबिनेट: UDF पोर्टफोलियो वार्ता में सहयोगियों की बढ़ती नाराजगी के कारण रुकावट

नई दिल्ली। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक फ्रंट (UDF) की सरकार गठन को लेकर मंत्रीमंडल में हुई नियुक्तियों के ऐलान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सरकारी गजट में नियुक्तियों की घोषणा में हुई देरी से संकेत मिल रहे हैं कि विभिन्न मंत्रिपद के बंटवारे को लेकर पार्टियों के बीच अनबन और मंथन जारी है।
सूत्रों के अनुसार, यूडीएफ गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच भागीदारी और पोर्टफोलियो के बंटवारे को लेकर सहमति अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हो पाई है। यह स्थिति गठबंधन के अंदर तनाव की भी गवाही दे रही है, जिससे मंत्रियों के चयन में विलंब हो रहा है।
गजट में नियुक्तियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है कि कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ में विभिन्न दलों और उनके नेताओं के बीच अपने-अपने दावे और आकांक्षाओं को लेकर प्रबल मुकाबला जारी है। खासकर उन सहयोगी दलों की नाराजगी बढ़ रही है, जो प्रमुख या महत्वपूर्ण विभागों की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, यूडीएफ के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी नेतृत्व स्थिति को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है और जल्द ही सभी विवादित मसलों का निपटारा कर मंत्रिमंडल के विस्तार की घोषणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन की एकता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी तरह के असंतोष को दूर किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल की राजनीति में लंबे समय से गठबंधन की भूमिका निर्णायक रही है, और मंत्रीमंडल में सहयोगी दलों को संतुष्ट करना कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इस बार भी यही स्थिति दिख रही है। उन्होंने कहा कि समय पर मंत्रिमंडल का गठन और प्रभावी पोर्टफोलियो आवंटन यूडीएफ की स्थिरता और आगामी चुनावी रणनीति पर सकारात्मक असर डालेगा।
इसके अलावा, विपक्षी दलों ने सरकार के अंदर इस देरी को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे गठबंधन के अंदर मतभेदों का संकेत माना है। कांग्रेस और उसके साथियों के बीच झगड़ों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस मुद्दे पर कोई घोषणा हो सकती है, क्योंकि राज्य विधानसभा के कुछ अहम फैसले और नीतिगत योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मंत्रिमंडल का पूरा गठन आवश्यक है।
इसमें कोई शक नहीं कि केरल के लोगों की उम्मीदें इस नए मंत्रिमंडल से जुड़ी हैं और वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द सक्रिय होकर विकास के काम शुरू करे। इसलिए यूडीएफ नेतृत्व पर दवाब भी बढ़ेगा कि वे यथाशिघ्र समस्याओं का समाधान करें।