शिक्षा

संसदीय स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के सुधारों की समीक्षा शुरू की

नई दिल्ली। संसद की एक महत्वपूर्ण स्थायी समिति ने हाल ही में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के सुधारों की समीक्षा के लिए बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा के. राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट में सुझाए गए सुधारों के कार्यान्वयन की स्थिति का जायजा लेना था। इसके साथ ही, समिति ने हाल ही में सामने आए NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच की प्रगति के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की स्थापना उच्च गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। के. राधाकृष्णन समिति को विशेष रूप से इस एजेंसी के ढांचे तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नियुक्त किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें दी थीं, जिनका उद्देश्य एजेंसी के कामकाज में सुधार और परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा करना था। संसदीय समिति ने इन सिफारिशों के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया।

बैठक में अधिकारीयों ने बताया कि के. राधाकृष्णन समिति द्वारा सुझाए गए ज्यादातर सुधार लागू किए जा चुके हैं, जिनमें परीक्षा की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना तथा तकनीकी उपकरणों का बेहतर उपयोग शामिल है। हालांकि, कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, जिन पर आगे कार्यवाही की आवश्यकता है।

इसके अतिरिक्त, NEET-UG 2023 परीक्षा के पेपर लीक की जांच भी चर्चा का एक अहम विषय बनी। इस मामले में आरोप लगाए गए हैं कि परीक्षा के प्रश्न पत्र की गुप्त जानकारी बाहर आ गई थी, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न उठे हैं। समिति ने इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम की प्रगति रिपोर्ट मांगी और जल्द से जल्द निष्पक्ष निष्कर्ष निकलाने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुधार और जांच एजेंसी की विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए नितांत आवश्यक हैं। वर्तमान दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं का भविष्य न केवल विद्यार्थी बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली के लिए भी महत्वपूर्ण है। संसदीय स्थायी समिति की इस समीक्षा से उम्मीद की जा रही है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी अपनी प्रक्रिया में और सुधार लाएगी तथा भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं नहीं आएंगी।

अगली बैठक में समिति इन सुधारों के प्रभाव और जांच की अंतिम रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करेगी। यह प्रक्रिया न केवल नीति निर्धारकों बल्कि आम जनता के लिए भी पारदर्शिता बढ़ाने का माध्यम बनेगी।

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